कोरबा। आकांक्षी जिला कोरबा में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितताओं के चलते आम जनता के लिए कारगर हथियार बनने में असफल साबित हो रहा है। ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त के तहत कराए गए कार्यों की जांच में लापरवाही और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के आदेश, पर कार्रवाई का नामोनिशान नहीं
2022-23 में 15वें वित्त से प्राप्त राशि से कराए गए कार्यों पर व्यापक लोकहित में जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ ने 6 नवंबर 2024 को आदेश जारी किए थे। इस जांच में ग्राम सभा की कार्यवाही पंजी, उपस्थिति पंजी, व्यय प्रमाणक, देयक-वाउचर और भौतिक सत्यापन जैसे 8 बिंदुओं पर ध्यान देने की बात कही गई थी।
हालांकि, जनपद पंचायत कोरबा और पाली दोनों ही आदेशों के प्रति उदासीन रहे।
- जनपद पंचायत पाली ने जांच का जिम्मा करारोपण अधिकारियों को सौंपकर इतिश्री कर ली।
- जनपद पंचायत कोरबा ने तो जांच आदेश ही जारी नहीं किया।
करारोपण अधिकारियों की निष्क्रियता
पाली के सीईओ ने 29 नवंबर 2024 को चार करारोपण अधिकारियों को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया, लेकिन आज तक रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसके बाद 19 दिसंबर 2024 को पुनः आदेश जारी किए गए, लेकिन परिणाम वही रहा।
कोरबा जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ ने जांच आदेश तक जारी नहीं किए। हालांकि नवपदस्थ सीईओ ने जांच प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया है, लेकिन जांच की गति अब तक सुस्त बनी हुई है।
सूत्रों के दावे: बड़े पैमाने पर अनियमितता
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायतों में फर्जी प्रस्तावों और दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का गबन हुआ है।
- फर्जी उपस्थिति पंजी लगाकर व्यय दिखाया गया।
- गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
- जन सूचना अधिकारियों ने आरटीआई के तहत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
इन पंचायतों में छुपाए गए दस्तावेज
करतला जनपद पंचायत की 32 ग्राम पंचायतों ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में कराए गए कार्यों की जानकारी छुपाई। इनमें तुमान, जर्वे, पुरैना, बरपाली, रामपुर, नोनदरहा, और सुखरीकला जैसी पंचायतें शामिल हैं।
जन सूचना अधिकारियों ने आरटीआई के तहत जानकारी साझा न करने के लिए विभिन्न बहाने बनाए। तुमान पंचायत ने शुल्क जानकारी नहीं दी, जबकि अन्य पंचायतों ने भ्रामक जानकारी देकर अपीलीय अधिकारियों को गुमराह किया।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आचार संहिता जल्द लागू होने की संभावना है। इससे पहले जांच को अंजाम तक पहुंचाने की संभावना कम ही नजर आ रही है।