कोरबा। कोरबा जिले में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) घोटाले को लेकर चल रही जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता ने जिले में खलबली मचा दी है। घोटाले में 40% कमीशनखोरी के आरोपों के चलते कई बड़े नाम निशाने पर हैं। हाल ही में आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त माया वारियर की गिरफ्तारी के बाद से ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने डीएमएफ फंड का गलत इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं कीं।
**कमीशनखोरी और ठेकेदारी में भ्रष्टाचार*
सूत्रों के मुताबिक, डीएमएफ के तहत कोरबा जिले को मिली अरबों की राशि में से बड़े हिस्से का उपयोग गलत तरीके से किया गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों को ठेका देकर उससे अवैध तरीके से कमीशन लिया गया, जिसमें विभागीय अधिकारियों की भी संलिप्तता सामने आई है। ED की जांच में खुलासा हुआ है कि कई ठेकेदारों को बिना किसी काम के मोटी रकम दी गई, जिसके एवज में 40% कमीशन लिया गया। इन घोटालों में आदिवासी विकास विभाग के साथ खनिज विभाग भी शामिल हो सकता है।
**बड़ी कार्रवाई की संभावना**
ईडी के पास कई ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों की लंबी सूची है, जो डीएमएफ घोटाले में लिप्त बताए जा रहे हैं। कोरबा जिले में एक से डेढ़ दर्जन गिरफ्तारी होने की संभावना है, जिसके बाद से कई लोग या तो भूमिगत होने की फिराक में हैं या फिर समर्पण करने की कोशिश कर रहे हैं।
**ED की तेज कार्रवाई**
ED की जांच में कई प्रमुख नाम सामने आए हैं, जिनमें संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी, मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल, और शेखर जैसे लोग शामिल हैं। इन पर सामग्री की सप्लाई में वास्तविक कीमत से ज्यादा का बिल बनाकर भारी मुनाफा कमाने का आरोप है।
**पूर्व कलेक्टर के कार्यकाल में गड़बड़ी**
पूर्व कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में डीएमएफ राशि का दुरुपयोग किया गया था। छात्रावासों की मरम्मत और अन्य कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन संबंधित दस्तावेज गायब हो गए हैं। अनुमान है कि करीब 6 करोड़ 62 लाख रुपये में से 3 करोड़ रुपये ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया, लेकिन यह राशि किस काम के लिए दी गई, इसका कोई प्रमाण नहीं है।
जांच में सामने आया है कि ठेकों की राशि का 40% हिस्सा सरकारी अधिकारियों को कमीशन के रूप में दिया गया। प्राइवेट कंपनियों के टेंडरों पर 15 से 20% तक का अतिरिक्त कमीशन भी लिया गया।
कोरबा में ED की इस तेज कार्रवाई से घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द ही कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही ED की टीम कोरबा में आकर घोटाले से जुड़े और भी लोगों को गिरफ्तार कर सकती है।









