कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम साजापानी के जंगल में मंगलवार सुबह एक नन्हे हाथी का जन्म हुआ। हाथियों के झुंड में नवजात शावक की मौजूदगी की जानकारी सुबह करीब 6 बजे गश्त और हाथी ड्यूटी पर तैनात वनकर्मियों को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई और मां व शावक की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी गई।
वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। घने जंगल और झाड़ियों के कारण जमीन से निगरानी करने में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। विभाग इस बात का भी ध्यान रख रहा है कि ड्रोन के संचालन से हाथियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
मां और नवजात हाथी की सुरक्षा के लिए ड्रोन से निगरानी
करतला वन परिक्षेत्र के बीट लबेद अंतर्गत साजापानी के आसपास का जंगल हाथियों की आवाजाही वाला क्षेत्र है। ऐसे में नवजात शावक और उसकी मां की सुरक्षा वन विभाग के लिए प्राथमिकता बनी हुई है।
ड्रोन कैमरे के माध्यम से झुंड की स्थिति और गतिविधियों का आकलन किया जा रहा है, ताकि हाथियों की निगरानी के साथ किसी भी संभावित खतरे से बचाव किया जा सके।
नवजात हाथी के करीब जाने से बचें, मादा हो सकती है आक्रामक
वन विभाग के अनुसार, जन्म के शुरुआती दिनों में हाथी का बच्चा अपनी मां और झुंड पर पूरी तरह निर्भर रहता है। इस दौरान मादा हाथी अपने शावक की सुरक्षा को लेकर अधिक संवेदनशील और आक्रामक हो सकती है। ऐसे में हाथियों के करीब जाने की कोशिश करना लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इसी को देखते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने और हाथियों के झुंड से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
जलाऊ लकड़ी और वनोपज लेने जंगल न जाएं ग्रामीण
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि फिलहाल हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी और लघु वनोपज लेने के लिए भी न जाएं। खासकर रात के समय हाथियों के संभावित रास्तों और खेतों के आसपास आवाजाही करने से बचें।
यदि किसी ग्रामीण को हाथियों का झुंड दिखाई देता है, तो उसे हाथियों को भगाने या उनके पास जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सुरक्षित स्थान पर रहते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
फोटो-वीडियो बनाने के लिए हाथियों के पास न लगाएं भीड़
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि नवजात शावक को देखने के लिए हाथियों के पास जाना, फोटो-वीडियो बनाना, तेज आवाज करना या झुंड को घेरने की कोशिश करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इससे हाथी उत्तेजित हो सकते हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
विभाग ने लोगों से अपुष्ट सूचनाएं सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने की भी अपील की है। ऐसी सूचनाओं के कारण उत्सुकतावश लोग मौके पर पहुंच सकते हैं, जिससे हाथियों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
वन विभाग की टीम साजापानी के जंगल में हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और हाथियों के प्राकृतिक आवास में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें।






