बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य में विद्युत अधोसंरचना (इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) के निरीक्षण और रखरखाव की मौजूदा व्यवस्था, ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे सुरक्षा उपायों तथा लापरवाही तय करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी मांगी है।
बिजली युक्त फेंसिंग पर जताई चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि खेतों, फार्महाउस और घरों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से लगाई जा रही बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगातार लोगों की जान ले रही है। फसल, संपत्ति या पशुओं की सुरक्षा के नाम पर लगाए गए ऐसे बिजलीयुक्त तारों की चपेट में आने से अनजान लोगों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और कई मामलों में उनकी मौत तक हो रही है।
‘सिर्फ आपराधिक केस दर्ज करना पर्याप्त नहीं’
खंडपीठ ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज तो किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे स्पष्ट है कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। इन हादसों को रोकने के लिए प्रभावी, स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।
इंसानों के साथ वन्यजीव भी हो रहे शिकार
अदालत ने यह भी कहा कि बिजली प्रवाहित फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। इसकी चपेट में आकर घरेलू पशु और वन्यजीव भी अपनी जान गंवा रहे हैं। इसलिए यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
गौरतलब है कि हाल ही में बिलासपुर जिले में करंट लगने से एक पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। अब CSPDCL के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा विभाग के सचिव को अदालत के समक्ष शपथपत्र प्रस्तुत कर सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी देनी होगी।










