Saturday, May 9, 2026

कोरबा में आदिवासी जमीन विवाद: बेनामी खरीद के आरोपों पर किसान सभा का प्रदर्शन, जांच शिविर का आश्वासन

चेतावनी दी है कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।कोरबा। जिले के भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन हड़पने के आरोपों को लेकर किसान सभा ने जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

पतरापाली एक आदिवासी बहुल गांव है, जहां अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी लोग पंजीयन से जुड़े पुराने दस्तावेज दिखाकर उनकी पैतृक जमीन पर दावा कर रहे हैं और उन्हें बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले एक महीने से गांव में आकर कुछ लोग यह कह रहे हैं कि उन्होंने वर्ष 1990 में यह जमीन खरीदी थी, जबकि गांव का कोई भी व्यक्ति उन्हें पहचानता तक नहीं है। आरोप है कि प्रभावशाली लोग कानून की जानकारी का फायदा उठाकर आदिवासी किसानों की जमीन हड़पना चाहते हैं।

मामला तब और गंभीर हो गया जब एक गैर-आदिवासी व्यक्ति ने मंगल सिंह और भूखन लाल नामक दो सगे भाइयों को उनकी जमीन से बेदखल कर वहां घेरा डाल दिया।

प्रदर्शन के दौरान किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू और सीटू के राज्य महासचिव एस.एन. बनर्जी ने कहा कि इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने वर्ष 1999 के एक मामले का हवाला देते हुए बताया कि उस समय प्रशासन ने आदिवासी के पक्ष में फैसला देते हुए अवैध भूमि अंतरण को निरस्त किया था।

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को अंतरण कानूनन प्रतिबंधित है। ऐसे में 40-50 साल पुराने सौदों का दावा करना संदेहास्पद है, जबकि मूल भूस्वामी आज भी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं।

ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने गांव में शिविर लगाकर भूमि विवाद की जांच और निराकरण का आश्वासन दिया है। वहीं किसान सभा और सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।