knn24news/ रायपुर के बोरिया खुर्द इलाके के श्मशान घाट के गेट के बाहर आग की तपिश और लाल लपटों की रोशनी महसूस हो रही थी। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने अंदर देखा तो एक साथ 11 चिताएं जल रही थीं। ये सभी कोविड संक्रमित मृतकों के शव थे। अंतिम संस्कार करने आए एक पहल संस्था के रितेश अग्रवाल ने बताया इस श्मशान में एक साल में भी इतने शव नहीं लाए जाते थे। आसपास रहने वाले लोग भी अंतिम संस्कार के लिए रायपुर के टिकरापारा स्थित श्मशान जाते थे। ये श्मशान बना तो था मगर एक साल से कोई अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। अब यहां अंतिम संस्कार के लिए एक साथ कई शव आ रहे हैं।
सड़ रही लाशें
रायपुर के अंबेडकर अस्पताल के कोविड वार्ड में हर रोज औसतन 20 कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही है। इनमें प्रदेश के दूसरे जिलों के मरीज भी शामिल हैं। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि अब शवों को अंतिम संस्कार के लिए भेजने की प्रक्रिया में देरी, फ्रीजर की कमी की वजह से शव सड़ने लगे हैं। कुछ लाशों में कीड़े भी लग चुके हैं। दूसरी तरफ हर दिन हो रही मौत के बाद फिर नए शव, मर्चुरी पहुंचा दिए जा रहे हैं। अंतिम संस्कार के काम में प्रशासन की मदद कर रहे एक पहल संस्था के रितेश अग्रवाल ने बताया कि कीड़े लग चुकी लाशें हमें भी सौंपी गईं। सावधानी से इन्हें श्मशान तक लाया जा रहा है, इसके बाद अंतिम संस्कार कर रहे हैं।









