Monday, September 28, 2026

कोयला चोरी मामले में निष्पक्ष जांच की सीएम भूपेश बघेल से मांग की भाजपा नेता केदारनाथ अग्रवाल ने

कोरबा – कोरबा में चल रहे कोयले के गोरखधंधे का जब वीडियों वायरल हुआ तक पूरा प्रशासनिक अमला सक्ते में आया। पूर्व आई ए एस अधिकारी एवं भाजपा नेता ओ पी चौधरी द्वारा कोयला खदान से संबंधित वीडियो ट्वीट करने के बाद कोरबा का प्रशासनिक एवं पुलिस अमला एकदम से एकाएक सक्रिय हुआ है। पुलिस महानिरीक्षक रतन लाल डांगी, बिलासपुर रेंज द्वारा जांच टीम का गठन किया जाना और स्थानीय पुलिस द्वारा कोयला खदानों से लगे हुए हरदीबाजार एवं दीपका प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर लाईन अटैच किया जाने के साथ-साथ वायरल वीडियो से मचे बवाल के बाद खदानों के आसपास सैंकड़ों टन कोयला के भण्डारण जब्ती एवं ट्रेलर एवं अन्य मालवाहक गाड़ियों का जब्त होना तथा जगह-जगह सीमेंट की बोरी में पकड़े जाने के साथ-साथ कुछ दिनों पूर्व सुराकछार स्थित खदान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा यह मांग किया जाना कि कोयला चोर खुलेआम कोल स्टॉक से बेखौफ होकर कोयला चोरी कर रहें हैं।

 

एक तरफ स्टॉक में कमी होने पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बचाने के लिए एकमात्र उपाय खदान बंद किये जाने की मांग गंभीर चिंता का विषय एवं सोचनीय प्रश्न है। कोरबा के भाजपा नेता केदारनाथ अग्रवाल ने सीएम को पत्र लिखकर प्रश्न कर रहे है कि आखिर वीडियो वायरल होने के बाद केन्द्र एवं राज्य के अलग-अलग पार्टी के जनप्रतिनिधि सहित राजनैतिक संगठनों से जुड़े नेता अपनी-अपनी सरकार के पक्ष मे बयान जारी कर रहें हैं और वायरल हुये वीडियो की सत्यता की जांच होने के पक्ष में अपना सर्टिफिकेट जारी कर रहें है।

 

पहले भी समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से जो समाचार सामने आ रहें है इसमें संबंधित क्षेत्र के विधायक पुरूषोत्तम कंवर, विधायक कटघोरा एवं मोहित राम केरकेट्टा, विधायक पाली तानाखार एवं दीपका नगर पालिका के अध्यक्ष श्रीमती संतोषी दीवान और दीपका नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष अनुप यादव जो कि भाजपा नेता है सभी एक ही बोल बोल कर राज्य प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के पक्ष में बयान जारी कर रहें हैं कि जिस प्रकार आम कहावत है कि सभी को एक तराजू में नही तौला जा सकता। पांचों उंगलिया बराबर नहीं होती लेकिन जब खाने की थाली में पड़ती है तो पांचो उंगलियां बराबर हो जाती है। यह हाल काले हीरे की धरती में हो रहा है कोयला, डीजल एवं कबाड़ चोरी का बन रहा है। इस संदर्भ को लेकर श्री अग्रवाल ने माननीय मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप कर उच्च स्तरीय जांच दल का गठन कर जांच करने की मांग की है। कोयला, डीजल एवं कबाड़ की चोरी की शिकायतों पर अंकुश पुलिस एवं प्रशासन द्वारा क्यों नहीं किया जाता रहा किसके संरक्षण में यह सब गोरखधंधा चल रहा था।

 

भाजपा नेता केदारनाथ अग्रवाल ने कहा कि ओ पी चौधरी के वीडियो वायरल होने के बाद मचे बवाल उपरांत पुलिस महानिरीक्षक रतन लाल डांगी द्वारा जांच कमेटी बनाया जाना कोयला प्रक्षेत्र के थाना प्रभारियों पर आखिर क्यों कार्यवाही की गई । यदि संबंधित थाना प्रभारी दोषी नही तो उन्हें क्यों हटाया गया ?

 

श्री अग्रवाल ने यह भी प्रश्न उठाया कि विधायक पुरूषोत्तम कंवर एवं मोहित राम केरकेट्टा द्वारा स्थानीय प्रशासन को जांच पूर्व ही प्रमाण पत्र दिया जाना क्या ये भी इस गोरखधंधा में संलिप्त है ? सेटेलाईट के माध्यम से दो वर्षों का डाटा निकाला जावे कि क्या कोयला खदान क्षेत्र जो आमजनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र होता है वहां पर अनाधिकृत गतिविधियां संचालित थी । क्या इसमें बड़े पैमाने पर अनाधिकृत जिसमें सायकल, मोटर सायकल, पथ बोझा और सीमेंट बोरियों से कोयला की ढुलाई (परिवहन) हुआ है तो किसके संरक्षण से हुआ है।

 

 

सोशल मीडिया में कोयला चोरी से संबंधित संकलन करने गये पत्रकारों को कोल माफियाओं द्वारा दौड़ाये जाने कैमरा लुटने आदि की घटना प्रसारित होने के बाद स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस द्वारा क्या कार्यवाही की गई ? विभिन्न स्थानों में कोयला की जब्ती होने के बाद भी संबंधित कोयला किस खदान का है जांच क्यों नहीं किया गया? किसके संरक्षण में गौण खनिज का प्रकरण बनाकर

संरक्षण दिया गया ? जांच किया जाए। देश में कोयले का संकट चल रहा है और इधर छत्तीसगढ़ में संचालित एशिया के सबसे बड़ा कोयला खदान में कोयले की लूट की छूट दे दी गई है।

 

एसईसीएल की किसी भी खदान में चले जायें, सैकड़ों की संख्या में लोगों को कोयला निकालते आसानी से देखा जा सकता है। सत्ताधारी कांग्रेस के ही दो विधायक पुरुषोत्तम कंवर व मोहित राम केरकेट्टा को सुरक्षा कवच बनाने की कोशिश की जा रही । इस सब विषय को लेकर भाजपा नेता केदारनाथ अग्रवाल ने सवाल उठाए।

 

विधानसभा क्षेत्र में संचालित कोयला खदानों में कोयले और डीजल की चोरी की घटनाएं नहीं हो रही है। प्रशासन को क्लीन चिट देते हुए जिस तरह से एसईसीएल प्रबंधन व वहां तैनात सीआईएसएफ त्रिपुरा राइफल्स के जवानों पर चोरी का ठीकरा फोड़ा जा रहा यह अनुचित है। विधायक जिस ढंग से कोयला चोरी की घटनाएं नहीं होने की बात कह रहे हैं उससे ऐसा लग रहा है कि वह अपने क्षेत्र में भ्रमण ही नहीं करते। वे केवल अपने निजी हितों के लिए अधिकारियों की चाटुकारिता में लगे हुए हैं। इसके पहले सीआईएसएफ के एक एएसआई ने डीजल चोरों के हमले का जवाब देते हुए फायरिंग किया था, उस वक्त पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या का प्रयास का मामला दर्ज कर दिया था।

 

चोरी की घटनाओं की रिपोर्ट लिखाने सुरक्षा विभाग थाना पहुंचता है तो उन्हें उल्टे पांव वापस लौटा दिया जाता है। ऐसे में अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने के बाद भी सुरक्षा अमला खुद को असहाय महसूस कर रहा है। एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्य महाप्रबंधक अपनी पीड़ा मीडिया के समक्ष बयां कर चुके हैं। उन्होंने कलेक्टर की बैठक में भी इस बात को रखा था। पुलिस यह बताए कि आखिर चोरी के मामले दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जाती। आखिर सुरक्षाकर्मी व सुरक्षा बल कब तक संरक्षण प्राप्त इन चोर गिरोह के हाथों पीटते रहेंगे। प्रशासन व पुलिस संयुक्त रूप से कोयले एवं डीजल चोरी को संरक्षण दे रहे हैं।

 

हर दिन सैकड़ों ट्रेलर चोरी का स्टीम कोयला जिले से बाहर रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, रायपुर, भिलाई, अंबिकापुर व बनारस भेजा जा रहा है। दो से ढाई रुपए प्रति किलो के हिसाब से ग्रामीणों से कोयला तस्कर खरीद रहे हैं। पैसे का लालच देकर ग्रामीणों से यह अवैध काम कराया जा रहा है। ईट भट्ठा व लघु उद्योगों को 10 हजार प्रति टन तक ब्लैक में कोयला चोर गिरोह बेच रहे हैं। पुलिस महा निरीक्षक रतनलाल डांगी ने कोयला चोरी के मामले के जांच के आदेश दिए।

 

हरदीबाजार पुलिस चौकी व दीपका थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर कार्यवाही की औपचारिकता निभा दी गई हर माह एसईसीएल को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। यह एक बड़ा कोल स्कैंडल है, जिसमें राजधानी में रहने वाले सत्ता के कुछ करीबियों से भी तार जुड़े हैं। यही वजह है कि इस मामले की पर्देदारी के लिए उच्च स्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं। इसकी निष्पक्ष जांच प्रधानमंत्री कार्यालय व केंद्रीय कोयला मंत्रालय को सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

 

श्री अग्रवाल ने सीएम से कोयला चोरों की शिकायत की और ये सवाल भी उठाया कि वीडियो के वायरल होने के बाद बवाल किया गया । कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कंवर एवं पाली तानाखार विधायक मोहित राम केरकेट्टा, प्रशासन दोनों पक्ष यह तो स्वीकार कर रहे हैं कि चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है वायरल वीडियो की पुष्टि को लेकर जांच टीम गठित की गई। अब ऐसा लगता है केन्द्रीय सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस बल के बीच यदि जंग छीड़ता है तो यह अराजकता का वातावरण की श्रेणी में आने वाला राष्ट्रद्रोह जैसे अपराध माना जावेगा । प्रश्न यह है कि खदान के लिए केन्द्रीय बल जिम्मेदार है तो विभिन्न मार्गों पर स्थापित खनिज जांच केन्द्र नाका पुलिस चौकियां एवं थाना जहां बिना एंट्री दिये कोई भी वाहन निकल नहीं पाता है तो प्रशासन एवं पुलिस दोनों अपनी जिम्मेदारी से कैसे बचेंगे ।

 

सरकार अलग-अलग दल की हो सकती है लेकिन देश सभी भारतीयों का है सरकारें संपत्तियों पर सभी नागरिको का अधिकार है। इसे सुरक्षित रखने का जवाबदारी शासन प्रशासन की है। जिम्मेदारियों से निजी लाभ के लिए राष्ट्र को क्षति पहुंचाना गंभीर चिंता का विषय है।