Friday, September 11, 2026

कोरबा में अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग पर बड़ी कार्रवाई, NTPC जमनीपाली पर लगा 15 लाख का जुर्माना

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग के खिलाफ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा ने एनटीपीसी लिमिटेड जमनीपाली पर 15 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई है। यह कार्रवाई रूमगरा हवाई पट्टी चौक के पास खुले में फ्लाई ऐश डंप किए जाने के मामले में की गई।

शिकायत के बाद मौके पर पहुंची टीम

क्षेत्रीय अधिकारी प्रसन्ना सोनकर के अनुसार, विभाग को फोन के जरिए सूचना मिली थी कि रूमगरा हवाई पट्टी चौक के पास गुप्ता होटल के नजदीक सुनसान जमीन पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश डंप की जा रही है। सूचना मिलते ही पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम मौके पर पहुंची।

जांच के दौरान कई वाहनों से फ्लाई ऐश लाकर जमीन पर डंप किए जाने की जानकारी सामने आई। विभाग की जांच में पता चला कि वाहनों में एनटीपीसी लिमिटेड जमनीपाली के धनरास राखड़ बांध से फ्लाई ऐश लाई गई थी।

खुले में राखड़ फेंकने से पर्यावरण को खतरा

फ्लाई ऐश को खुले में और बिना अनुमति डंप किए जाने से आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसके अलावा फ्लाई ऐश के कण हवा में फैलने से आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्रीय अधिकारी ने एनटीपीसी लिमिटेड जमनीपाली के अधिकारियों को अवैध डंपिंग तत्काल बंद करने के निर्देश दिए। विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण करने के साथ डंप की गई फ्लाई ऐश की मात्रा का भी आकलन किया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर 15 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

मौके की जांच और रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एनटीपीसी लिमिटेड जमनीपाली पर 15 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई है। विभाग ने स्पष्ट किया कि फ्लाई ऐश का अवैध परिवहन और खुले में डंपिंग पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।

अवैध फ्लाई ऐश परिवहन पर जारी रहेगी निगरानी

क्षेत्रीय अधिकारी प्रसन्ना सोनकर ने बताया कि कोरबा जिले में फ्लाई ऐश के अवैध परिवहन और डंपिंग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऐसे मामलों में वाहनों को पकड़कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यदि इस तरह की गतिविधियां सामने आती हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और नियमानुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाई जाएगी।