Sunday, August 23, 2026

पेलोसी के ताइवान पहुंचते ही एक्शन में चीन:चारों तरफ से घेरा, लॉन्च कर दी मिसाइल ड्रिल; आखिर चीन की समस्या क्या है?

चीन की धमकी और बाइडेन की हिदायत के बावजूद अमेरिका की हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच चुकी हैं। मंगलवार शाम नैंसी पेलोसी को लेकर अमेरिका का मिलिट्री जेट राजधानी ताइपेई में लैंड हुआ। इसके बाद से ही चीन बौखलाया हुआ है और उसने आनन-फानन में कई आक्रामक फैसले लिए हैं।

PLA ने ताइवान के चारों तरफ 6 ‘नो एंट्री जोन’ घोषित किए हैं। यानी अब इन 6 रास्तों से कोई पैसेंजर प्लेन या शिप ताइवान नहीं पहुंच सकते हैं। चीन ने ताइवान के चारों ओर अपने J-20 फाइटर जेट और युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी के एशिया इंस्टीट्यूट में पढ़ाने वाले डॉ. सो कीट टोक कहते हैं कि चीन ताइवान से पेलोसी के विमान को जाने तक से रोक सकता है। पेलोसी और अन्य सांसदों को लेकर जा रहा विमान रोकने के लिए चीन हवाई नाकेबंदी कर सकता है।

चीन ने नॉर्थ, साउथ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट में ताइवान के जल और हवाई क्षेत्र में मिलिट्री ड्रिल, यानी सैन्य अभ्यास की घोषणा की है। पेलेसी के ताइवान पहुंचने पर चीन ने ताइवान के पूर्व में समुद्र में मिसाइलों का परीक्षण भी किया। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि असली हथियारों और गोला-बारूद से ये अभ्यास इस पूरे हफ्ते तक किया जाएगा। PLA ईस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता सीनियर कर्नल शी यी ने कहा कि सैन्य अभ्यास के दौरान लॉन्ग रेज लाइव फायर शूटिंग की जाएगी। साथ ही मिसाइल का भी टेस्ट होगा।

चीन ने ताइवान को नेचुरल सैंड के देने पर रोक लगा दी है। इससे ताइवान को काफी नुकसान हो सकता है। कोरोना महामारी के बाद से कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ताइवान के लिए इनकम का सोर्स बन गया है। ऐसे में सैंड, यानी रेत का निर्यात रोकने से ताइवान को आर्थिक नुकसान होगा। चीन के उप विदेश मंत्री झी फेंग ने अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स को समन किया है। फेंग ने कहा कि पेलोसी के ताइवान दौरे के गंभीर नतीजे होंगे।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि अमेरिका ताइवान का इस्तेमाल चीन को घेरने के लिए कर रहा है। अमेरिका लगातार ‘वन चाइना पॉलिसी’ को चुनौती दे रहा है। अमेरिका का यह रुख आग से खेलने जैसा है और यह बहुत ही खतरनाक है। जो आग से खेलेंगे, वो खुद जलेंगे।

चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रोविंस है, जबकि ताइवान खुद को एक आजाद देश मानता है। इस झगड़े को समझने के लिए दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के वक्त में जाना होगा। उस समय चीन के मेनलैंड में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और कुओमितांग के बीच जंग चल रही थी।

1949 में माओत्से तुंग की लीडरशिप में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी जीत गई और कुओमितांग के लोग मेनलैंड छोड़कर ताइवान चले गए। कम्युनिस्टों की नौसेना की ताकत न के बराबर थी। इसलिए माओ की सेना समंदर पार करके ताइवान पर नियंत्रण नहीं कर सकी।