Thursday, March 12, 2026

कोरबा में धान खरीदी अभियान अव्यवस्थाओं की भेंट, लक्ष्य से 47% पीछे जिला, उपार्जन केंद्रों में 127 करोड़ का धान जाम

कोरबा, 11 जनवरी आकांक्षी जिला कोरबा में चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत चल रहा धान खरीदी अभियान गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझता नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि लगभग दो माह बीत जाने के बावजूद जिले में निर्धारित लक्ष्य का आधा भी धान नहीं खरीदा जा सका है। वहीं, समर्थन मूल्य पर खरीदे गए साढ़े पांच लाख क्विंटल से अधिक धान का उठाव नहीं हो पाने से उपार्जन केंद्रों में 127 करोड़ रुपये से अधिक का धान जाम पड़ा हुआ है।

जिले को इस विपणन वर्ष में 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य मिला है। इसके लिए 52 हजार पंजीकृत किसानों के माध्यम से 41 सहकारी समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों पर खरीदी की जानी है। लेकिन 10 जनवरी तक केवल 27 हजार 216 किसान ही धान बेच पाए हैं और कुल 16 लाख 45 हजार 565.60 क्विंटल धान की खरीदी हो सकी है। समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी कुल राशि 389 करोड़ 83 लाख रुपये से अधिक बैठती है। यानी जिला अभी लक्ष्य से करीब 47 प्रतिशत पीछे है।

आने वाले दिनों में लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती
शेष अवधि में लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रतिदिन औसतन 1 लाख 13 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी करनी होगी, जो मौजूदा हालात में बेहद कठिन नजर आ रही है। अभी भी जिले के 24 हजार से अधिक किसान ऐसे हैं, जो अपना धान नहीं बेच पाए हैं और खरीदी की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

धान उठाव की रफ्तार धीमी
अब तक 120 से अधिक पंजीकृत राइस मिलरों द्वारा 10 लाख 89 हजार 336 क्विंटल धान का उठाव किया गया है, जो कुल खरीदी का 66.27 प्रतिशत है। इसके बावजूद उपार्जन केंद्रों में 5 लाख 54 हजार 816 क्विंटल धान शेष है, जिसकी अनुमानित कीमत 127 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक है। मार्कफेड द्वारा भले ही जिले में खरीदे गए धान के कस्टम मिलिंग के लिए शत-प्रतिशत डीओ जारी करने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि धान उठाव की स्थिति 70 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सकी है।

पड़ोसी जिलों का धान, कोरबा के मिलरों को डीओ
इस बीच स्थिति को और जटिल बनाते हुए मार्कफेड द्वारा कोरिया, सरगुजा, बेमेतरा और जीपीएम जैसे पड़ोसी जिलों में खरीदे गए सवा आठ लाख क्विंटल से अधिक धान के कस्टम मिलिंग के लिए कोरबा के राइस मिलरों को ऑनलाइन डीओ जारी कर दिए गए हैं। इससे जिले की 41 सहकारी समितियों और 65 उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है।

कुल मिलाकर, धान खरीदी और उठाव की धीमी रफ्तार ने कोरबा जिले के खरीफ विपणन अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शीघ्र व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो न केवल लक्ष्य प्रभावित होगा, बल्कि किसानों और सहकारी समितियों की परेशानी भी और बढ़ सकती है।