रायपुर। सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट के मामले ने अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया है। छत्तीसगढ़ के 500 से अधिक तहसीलदार बुधवार को कलमबंद हड़ताल पर रहे। अधिकारियों ने भाजपा विधायक Ramkumar Toppo की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया।
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे तहसीलदारों ने रायपुर के तुता धरना स्थल पर प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते अधिकांश तहसीलों में राजस्व और न्यायालयीन कार्य प्रभावित रहे। कई स्थानों पर नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला
विवाद की शुरुआत सीतापुर में हुई एक घटना से हुई, जिसमें नायब तहसीलदार तुषार मानिक और विधायक रामकुमार टोप्पो आमने-सामने आ गए थे। विधायक का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने उनकी चचेरी बहन के साथ अभद्र व्यवहार किया था। वहीं नायब तहसीलदार का कहना है कि विधायक और उनके समर्थकों ने उन पर हमला कर मारपीट की।
घटना के बाद दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से प्रशासनिक अधिकारियों में नाराजगी बनी हुई है।
गिरफ्तारी नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश
तहसीलदार संघ का कहना है कि सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। इससे पहले 30 मई को भी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान विधायक रामकुमार टोप्पो ने स्वयं गिरफ्तारी देने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर अधिकारियों ने फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस विधायक Devendra Yadav ने आरोप लगाया कि सरकार अपने विधायक को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
पटवारी संघ का समर्थन, वकीलों का विरोध
प्रदेशव्यापी हड़ताल को पटवारी संघ का समर्थन मिला है। वहीं कुछ वकील संगठनों ने हड़ताल का विरोध करते हुए कहा कि इससे आम नागरिकों के जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें सरकार तथा पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।







