Monday, March 16, 2026

राजीव गांधी शिक्षा मिशन में करोड़ों का घोटाला: कंप्यूटर खरीदी मामले में EOW/ACB ने कोर्ट में पेश किया चालान

रायपुर। राज्य के Economic Offences Wing और Anti Corruption Bureau (EOW/ACB) रायपुर ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन में कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है।

ब्यूरो ने इस मामले में अपराध क्रमांक 38/16 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) भादवि के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर जांच की थी। विस्तृत विवेचना के बाद सोमवार 16 मार्च को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर के समक्ष आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया।

कंप्यूटर योजना में हुआ घोटाला

जांच में सामने आया कि Rajiv Gandhi Shiksha Mission के तहत कंप्यूटर समर्थित योजना में राज्य के उस समय के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं को एलएफडी/टीएफटी कंप्यूटर युक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे। इसके लिए दो चरणों में कुल 638 एलएफडी/टीएफटी मॉनिटर की मांग की गई थी। इनमें वर्ष 2010-11 में 246 और वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर शामिल थे।

फर्जी दस्तावेजों से शासन को किया गुमराह

मामले में मिनी इंफोटेक रायपुर के संचालक आलोक कुशवाहा ने वर्ष 2010-11 में 246 मॉनिटर की आपूर्ति की, जबकि ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर ने वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर सप्लाई किए। जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए एचपी और एग्माटेल कंपनियों के फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार कर शासन को गुमराह किया।

मॉनिटर की कीमतों में भारी गड़बड़ी

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिन मॉनिटरों का बाजार मूल्य करीब 57,950 रुपये प्रति नग था, उन्हें शासन को 1,26,500 रुपये प्रति नग की दर से सप्लाई किया गया। इस तरह फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के जरिए शासन को 4 करोड़ 72 लाख 88 हजार 462 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।

तीन आरोपियों के खिलाफ चालान

मामले की विवेचना पूरी होने के बाद EOW/ACB ने आरोपी आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है। वहीं मामले से जुड़े शासकीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अनुशंसा भी भेजी गई है।