Thursday, April 30, 2026

9 मार्च को छत्तीसगढ़ का बजट:विधानसभा अध्यक्ष बोले -सदन की कार्यवाही में अब हर साल बचेंगे 58 पेड़, करीब 10 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड भी कम होगा

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सात मार्च से शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल अनुसूईया उइके के अभिभाषण से होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 9 मार्च को साल 2022-23 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, सदन की कार्यवाही में अब हर साल 58 पेड़ बचेंगे। वहीं पर्यावरण में करीब 10 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होगा।

 

 

9 मार्च को छत्तीसगढ़ का बजट:विधानसभा अध्यक्ष बोले -सदन की कार्यवाही में अब हर साल बचेंगे 58 पेड़, करीब 10 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड भी कम होगा

रायपुरएक घंटा पहले

 

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र सात मार्च से शुरू हो रहा है। शुरुआत राज्यपाल अनुसूईया उइके के अभिभाषण से होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 9 मार्च को साल 2022-23 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, सदन की कार्यवाही में अब हर साल 58 पेड़ बचेंगे। वहीं पर्यावरण में करीब 10 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होगा।

 

डॉ. चरणदास महंत विधानसभा में इस सत्र से शुरू हुई सवाल-जवाब की ऑनलाइन प्रणाली के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने बताया, लेस पेपर प्रणाली के प्रभाव पर उन्होंने IIT खड़गपुर के पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग से एक अध्ययन कराया है। उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट आ गई है। इसके मुताबिक पिछले आठ सालों में विधायकों ने 36 हजार 650 सवाल लगाए हैं। यानी औसतन हर साल 4 हजार 550 सवाल पूछे गए हैं। प्रश्न पूछने से उसका उत्तर आने के प्रत्येक चरण में करीब 100 पेज का उपयोग संभावित है। ऐसे में सालाना चार लाख 55 हजार पेज खर्च होते हैं। अगर यह खर्च रुकता है तो करीब 2.2 टन कागज की बचत होगी। इसकी वजह से हर साल 9.68 टन लकड़ी या 58 पेड़ कटने से बच जाएंगे। कागज बनाने की प्रक्रिया में लगने वाले एक लाख लीटर पानी की बचत होगी। वहीं इतनी बिजली बच जाएगी जितनी 73 घरेलू रेफ्रीजरेटर को एक साल तक चलाने के लिए काफी है। IIT के अध्ययन में बताया गया है, इस पूरी प्रक्रिया से हर साल 9.9 टन कॉर्बनडाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। दूसरे पर्यावरणीय प्रभावों की भी बारीक जानकारी इस अध्ययन में दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, पहली बार ही 90% सवाल ऑनलाइन ही मिले हैं।

 

क्या है यह सवाल-जवाब की ऑनलाइन प्रणाली

 

विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक, विधानसभा के जरिए विभागों से लिखित सवाल पूछते हैं। इसके लिए एक तय प्रारूप में सवाल लिखकर देने होते हैं। विधानसभा इन प्रश्नों को छांटकर संबंधित विभाग को जवाब के लिए भेजती है। वहां से जवाब आने के बाद इनको छापा जाता है। इस साल से यह प्रक्रिया बदल दी गई है। विधायकों से ऑनलाइन सवाल मंगाए गए। सवाल छांटने के बाद विधानसभा ने ऑनलाइन ही उसे विभागों को भेज दिया। विभाग ने ऑनलाइन ही उसका जवाब भेज दिया।