वेल्लोर. शनिवार को, 31 सालों की सजा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन (Nalini Sriharan) को जेल से रिहा कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही इस हत्याकांड के सभी 6 दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था। नलिनी श्रीहरन, उसके पति मुरुगन और संथन को शनिवार शाम को वेल्लोर जेल से औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया। नलिनी ने पैरोल शर्तों के मुताबिक सुबह में एक स्थानीय पुलिस थाने में अपनी हाजिरी भी लगाई। कांग्रेस ने रिहाई के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। नलिनी के अलावा उसके पति वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, आर.पी. रविचंद्रन, संतन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार को दोषी ठहराया गया था। श्रीहरन, संतन, रॉबर्ट और जयकुमार श्रीलंकाई नागरिक हैं जबकि नलिनी और रविचंद्रन तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं।दरअसल, नलिनी ने समय से पहले रिहाई की मांग को लेकर अदालत का रुख किया था। मद्रास हाई कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वहीं तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि वह राजीव गांधी हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रही नलिनी श्रीहरन और आरपी रविचंद्रन की समय से पूर्व रिहाई के पक्ष में है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने एक अन्य दोषी, एजी पेरिवलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाया। 18 मई को, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरिवलन की रिहाई के आदेश दिए थे। उसी के आधार पर सुप्रीम ने सभी 6 दोषियों को रिहा करने का फैसला सुनाया।










