Monday, April 20, 2026

कोरबा में राखड़ बांध की रेजिंग पर उठे सवाल, तकनीकी मानकों के पालन पर बहस तेज

कोरबा। Chhattisgarh State Electricity Board के अंतर्गत आने वाले राखड़ बांध की रेजिंग (ऊंचाई बढ़ाने) का कार्य इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में झाबू राखड़ डैम के टूटने के बाद मरम्मत और मजबूती के साथ ऊंचाई बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस कार्य की जिम्मेदारी Shankar Engineering को सौंपी गई है।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मैदान में काम की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका दावा है कि फिलिंग के दौरान जेसीबी मशीनों से सीधे राख डाली जा रही है, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार परत-दर-परत मजबूती सुनिश्चित करना जरूरी होता है।

 

 

 

क्या कहती है तकनीकी प्रक्रिया?

 

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राखड़ डैम की रेजिंग से पहले बेस की स्ट्रिपिंग की जाती है, ताकि पुरानी और कमजोर परत हटाई जा सके। इसके बाद वाइब्रेटर मशीन से कॉम्पैक्शन किया जाता है, जिससे नीचे की सतह मजबूत हो सके।

 

इसके बाद लगभग 300 मिमी (0.30 मीटर) मोटी राख की परत बिछाई जाती है और उसे अच्छी तरह दबाकर समतल किया जाता है। केवल राख भर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। तकनीकी गाइडलाइन के मुताबिक बीच-बीच में लगभग आधा मीटर मोटी रेत की परत डाली जाती है, जिससे पानी का निकास बना रहे और आंतरिक दबाव न बढ़े।

 

हर परत के बाद कॉम्पैक्शन अनिवार्य बताया गया है, ताकि भविष्य में धंसाव, दरार या रिसाव की समस्या न आए।

 

 

 

बार-बार टूटने की घटनाओं से बढ़ी चिंता

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भी बांध की मजबूती को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हर बारिश के बाद कहीं न कहीं दरार, रिसाव या क्षति की खबर सामने आती रही है। ऐसे में इस बार की रेजिंग को लेकर लोगों में उम्मीद के साथ आशंका भी बनी हुई है।

 

कुछ लोग इसे इंजीनियरों की दूरदर्शिता बता रहे हैं, तो कुछ इसे जल्दबाजी या लागत बचाने का प्रयास मान रहे हैं।

 

 

 

बारिश में होगी असली परीक्षा

 

फिलहाल कोरबा में तकनीक बनाम जुगाड़ की बहस जारी है। कागजों पर प्रक्रिया वैज्ञानिक और संतुलित नजर आती है, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है, यह आने वाला मानसून तय करेगा।

 

जब बारिश का पानी दबाव बनाएगा, तभी राखड़ बांध की मजबूती और रेजिंग कार्य की गुणवत्ता की असली तस्वीर सामने आएगी।