रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल है। सत्ता के गलियारों से लेकर संगठन की बंद कमरों वाली बैठकों तक, हर तरफ बस एक ही चर्चा है—क्या छत्तीसगढ़ भाजपा में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है? कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी आगामी 2028 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए ‘परफॉर्मेंस ट्यूनिंग’ के मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें सत्ता और संगठन दोनों का चेहरा बदला जा सकता है।
डिप्टी सीएम को राष्ट्रीय जिम्मेदारी और ‘महिला कार्ड’
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा डिप्टी सीएम विजय शर्मा को लेकर है। सूत्रों की मानें तो उनके चुनावी मैनेजमेंट और आक्रामक कार्यशैली को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही, अरुण साव का नाम भी चर्चा में है।
यदि डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव होता है, तो भाजपा एक तीर से कई निशाने साधने की तैयारी में है। चर्चा है कि पार्टी किसी महिला चेहरे (जैसे लता उसेंडी या रेणुका सिंह) को डिप्टी सीएम बना सकती है। यह कदम न केवल महिला प्रतिनिधित्व का संदेश देगा, बल्कि बस्तर-सरगुजा के आदिवासी समीकरणों को भी साधेगा।
मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री
हालांकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व पर केंद्रीय नेतृत्व को पूरा भरोसा है, लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल की आहट तेज है। बताया जा रहा है कि 2 से 4 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह ऊर्जावान नए विधायकों को मौका मिल सकता है। रेस में भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा और सुशांत शुक्ला जैसे नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
संगठन में ‘रीसेट’ का समय
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के कार्यकाल को लेकर भी सुगबुगाहट तेज है। पार्टी चाहती है कि सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल हो। बंगाल चुनाव जैसे कठिन मोर्चों पर खुद को साबित करने वाले छत्तीसगढ़ के नेताओं को अब दूसरे राज्यों या राष्ट्रीय टीम में प्रमोट किया जा सकता है।
बदलाव की वजह: परफॉर्मेंस और समन्वय
भाजपा अब चुनाव का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपनी टीम को दुरुस्त करने की रणनीति पर चल रही है। 12-13 मई की महत्वपूर्ण बैठकों में भले ही कोई औपचारिक ऐलान न हो, लेकिन नेताओं की ‘बॉडी लैंग्वेज’ और सक्रियता भविष्य के बड़े फैसलों का संकेत जरूर दे देगी।








