कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा में गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद सामने आया है। हिंदू नारायणी सेना की आपत्ति के बाद शहर के मूर्तिकारों की आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में मूर्तिकारों ने प्रतिमाओं के स्वरूप में हुई गलतियों को स्वीकार करते हुए 100 से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं में तत्काल सुधार किया।
यह बैठक माटी मूर्तिकार विकास समिति कोरबा के अध्यक्ष बिसाहू राम कुंभकार की अध्यक्षता में हुई। इसमें हिंदू नारायणी सेना के पदाधिकारियों के साथ दो पंडित भी शामिल हुए। बैठक में गणेश प्रतिमाओं के विभिन्न स्वरूपों पर चर्चा की गई और कई प्रतिमाओं में आसन, सिर, पेट सहित अन्य अंगों के स्वरूप में सुधार की बात कही गई।
कार्टून और AI स्वरूप में प्रतिमा बनाने पर जताई आपत्ति
हिंदू नारायणी सेना ने आरोप लगाया कि कुछ मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को कार्टून, बाल या AI स्वरूप में तैयार कर रहे थे। कुछ प्रतिमाओं में भगवान गणेश के नाचते-गाते स्वरूप भी बनाए जा रहे थे।
सेना ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मूर्तिकारों के साथ बैठक कर प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर चर्चा की गई।
मूर्तिकारों ने मानी गलती, मौके पर किया सुधार
बैठक के दौरान हिंदू नारायणी सेना के पदाधिकारियों ने प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर अपनी आपत्ति सामने रखी। इसके बाद मूर्तिकारों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 100 से अधिक प्रतिमाओं में मौके पर ही सुधार किया।
बैठक में भविष्य में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप में इस तरह की गलती नहीं दोहराने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
पंडितों ने किया गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण
बैठक के बाद हिंदू नारायणी सेना, मूर्तिकारों और पंडितों की टीम ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर बन रही गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान जहां प्रतिमाओं के स्वरूप में कमियां बताई गईं, वहां मूर्तिकारों ने तत्काल आवश्यक सुधार किया।
पूजा समितियों से शास्त्रों के अनुसार प्रतिमा बनवाने की अपील
हिंदू नारायणी सेना ने शहर की सभी गणेश पूजा समितियों से अपील की है कि आधुनिकता या अलग दिखने की कोशिश में भगवान के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव न किया जाए।
सेना ने पूजा समितियों से धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों में बताए गए स्वरूप के अनुसार गणेश प्रतिमाएं बनवाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि भगवान की प्रतिमा तैयार करते समय धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।








