बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों में रिक्त पदों पर भर्ती की धीमी प्रक्रिया और बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव स्थित ओपन जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने डीजी जेल से शपथपत्र के जरिए पूछा है कि जेलों में खाली पदों पर भर्ती कब तक पूरी होगी। वहीं, पथर्रा ओपन जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने पर डीजीपी से भी जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस केआर महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की प्रगति और जेल संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को होगी।
पथर्रा ओपन जेल में 48 पदों के सृजन का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने पिछली सुनवाई में बताया था कि बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 14 जुलाई 2026 को अधिसूचना जारी कर ओपन जेल स्थापित की गई। इसके बाद 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ ओपन जेल संचालन एवं प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए गए।
सरकार के अनुसार, ओपन जेल के सुचारू संचालन के लिए 48 पदों के सृजन और सीधी भर्ती की अनुमति का प्रस्ताव भेजा गया है। जेल अधीक्षक सहित अन्य जरूरी अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।
सुरक्षा बल की कमी पर DGP से जवाब तलब
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि पथर्रा ओपन जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा बल उपलब्ध कराने का मुद्दा अब भी लंबित है। इसके लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की एक कंपनी तैनात करने के संबंध में पुलिस महानिदेशक से कई बार अनुरोध किया गया है।
इस पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को भी शपथपत्र प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
कैदियों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजना
पथर्रा ओपन जेल का उद्देश्य पात्र बंदियों को सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है। सरकार के मुताबिक, पात्र कैदियों की पहचान और अन्य जेलों से स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। यहां बंदियों को कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है।
अब हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान जेलों में रिक्त पदों पर भर्ती की समयसीमा और पथर्रा ओपन जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।



