रायपुर.छत्तीसगढ़ में अब जबरन धर्मांतरण के मामलों पर पूरी तरह लगाम लगाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार एक नया और सख्त धर्म स्वातंत्र्य कानून लाने जा रही है, जिससे किसी भी व्यक्ति के लिए धर्म परिवर्तन करना अब आसान नहीं होगा। इस कानून के तहत धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक दायरे में लाया जाएगा, और नियमों का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान होगा।

धर्मांतरण के नाम पर प्रलोभन, दबाव, या जबरदस्ती करने वाले लोगों को अब बख्शा नहीं जाएगा। छत्तीसगढ़ गृह विभाग ने अन्य राज्यों में लागू कानूनों का गहराई से अध्ययन करना शुरू कर दिया है, और उत्तर प्रदेश का धर्म स्वातंत्र्य कानून इसका मुख्य आधार बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश का यह कानून देश में सबसे सख्त और प्रभावी माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार इसे अपने राज्य में लागू करने की योजना बना रही है, ताकि धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियंत्रित हो सके।

धर्मांतरण पर नियंत्रण की आवश्यकता क्यों?
राज्य में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जाता है। गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को प्रलोभन देकर उनका धर्म बदलवाने के मामलों ने सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया है। अब इस कानून के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर न किया जाए।

क्या होगा नए कानून में खास?

  1. सख्त प्रक्रिया: धर्मांतरण के लिए पहले से निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। बिना प्रक्रिया पूरी किए धर्म परिवर्तन को मान्यता नहीं दी जाएगी।
  2. कड़ी सजा: जबरन धर्मांतरण कराने वाले दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।
  3. पारदर्शिता: हर धर्मांतरण को कानूनी रूप से पंजीकृत करना अनिवार्य होगा।
  4. अनुकरणीय मॉडल: उत्तर प्रदेश समेत 8-10 राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर, उनकी बेहतरीन प्रथाओं को छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा।