Friday, October 2, 2026

क्या वसूली के लिए मदिरा प्रेमियों से वसूली कर रही प्रदेश सरकार, 6 महीने में दो बार बढ़े शराब के कीमत

*रायपुर* – छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही शराब की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है, जिससे आम जनता में नाराजगी का माहौल है। शराब की कीमतों में एक झटके में 160 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी गई है, जबकि कुछ ब्रांड के क्वार्टर (पौवा) की कीमतें 40 रुपये तक बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, बीयर की कीमतों में भी 30 रुपये का इजाफा दर्ज किया गया है।

राज्य में बीते छह महीनों में यह दूसरी बार है जब शराब के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे मदिरा प्रेमियों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। एक तरफ सरकार महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं के हितग्राहियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शराब के दाम बढ़ाकर इसकी भरपाई शराबियों से की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मूल्य वृद्धि का मुख्य उद्देश्य राज्य की लगभग 69.96 लाख हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के लिए राजस्व जुटाना है। लेकिन इससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

शराब की कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि के कारण मदिरा प्रेमियों के बीच गहरा असंतोष देखा जा रहा है। लोग सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना कर रहे हैं और इसे जनता विरोधी नीतियों का हिस्सा बता रहे हैं।

आम जनता का कहना है कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद जिस तरह से शराब की कीमतें बढ़ाई गई हैं, उससे साफ है कि सरकार को आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। लोगों का यह भी मानना है कि इस प्रकार की नीतियों से सरकार केवल अपने राजस्व को बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जबकि जनता को इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है।

सरकार के इस निर्णय के खिलाफ विपक्ष भी मुखर हो चुका है। कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। जनता के साथ-साथ विपक्ष भी मांग कर रहा है कि सरकार तुरंत इस मूल्य वृद्धि को वापस ले और आम जनता की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले।

*क्या शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अगले चुनाव पर पड़ेगा?*

विश्लेषकों का मानना है कि शराब की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और यह भाजपा सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।