कोरबा। साइबर अपराधियों को बैंक खाता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना अब भारी पड़ सकता है। कोरबा पुलिस ने म्यूल अकाउंट (Mule Account) के मामले में जिले के दो खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने कमीशन के बदले अपने बैंक खातों को अन्य लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था।
कमीशन के लालच में खाते दिए
पुलिस के अनुसार, साइबर थाना कोरबा में अलग-अलग बैंक खातों से जुड़े मामलों में धारा 317(2), 318(4) BNS के तहत अपराध दर्ज कर जांच की जा रही थी। विवेचना के दौरान दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा और के. प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर, कोरबा द्वारा लाभ कमाने के उद्देश्य से अपने बैंक खाते अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले इस्तेमाल करने के लिए देने की बात सामने आई। बाद में दोनों को पता चला कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
पुलिस ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। मामले की विवेचना अभी जारी है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराधी अक्सर लोगों को कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते हैं या पहले से संचालित खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम के लेन-देन के लिए करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले खातों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देने वाले खाताधारक भी जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की लोगों से अपील
कोरबा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में अपना बैंक खाता, ATM, सिम या मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें।
लोगों को सलाह दी गई है कि बैंक खाते, ATM/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साथ ही खाते में होने वाले लेन-देन पर नियमित नजर रखें।
पुलिस ने यह भी कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर या नकद निकालकर न दें। संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल बैंक और पुलिस को सूचना दें।
कोरबा पुलिस का संदेश: थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए अपना बैंक खाता या सिम किसी को देना आपको साइबर अपराध की जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में ला सकता है।











