Tuesday, March 17, 2026

स्कूलों बस में लगातार हो रहे हादसे से पालक परेशान, बच्चो को सुरक्षा को लेकर जिलाधीश और आरटीओ से की कार्यवाही की मांग, पिछले दिनों जैन पब्लिक स्कूल के बस में लगी थी आग, वसूला गया था 66 हजार का जुर्माना

कोरबा। बच्चों को देश का भविष्य माना जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में स्कूलों की अनदेखी के चलते एक साथ 7 बच्चों की मौत हो गई थी । इसके बाद कोरबा के जैन पब्लिक स्कूल की बस में भी आग लगने की घटना ने पलको को स्तब्ध कर दिया था । देवयोग से कोरबा में कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन उसके बाद भी परिजन अपने बच्चों को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। कोरबा में कई बसों का संचालन स्कूलों में किया जाता है, जो मेंटेनेंस के नाम पर जीरो है। लोगो ने जिलाधीश एवं आरटीओ के अधिकारियों से निवेदन है खासकर जिन बसों से स्कूली बच्चे आना-जाना करते हैं उनकी सही तरीके से जांच किया जाए । जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे सुरक्षित हो।

स्कूली बच्चों के परिवहन में लगे अनेक वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है। समय-समय पर एवं नियमित रूप से की जाने वाली जांच भले ही कागजों में नजर आती हो लेकिन हकीकत में यह तब दिखता है जब कोई घटना घट जाती है। पूर्व की घटनाओं को लेकर परिवहन विभाग के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी भी सबक नहीं लेते बल्कि हादसे के होने का इंतजार करते हैं। ऐसे में वे स्कूल प्रबंधन अपने आपको ठगा महसूस करते हैं जो नियमों के मामले में अप टू डेट रहते हैं लेकिन नियमों का हवाला देकर उन्हें भी चमकाने से अमला बाज नहीं आता, और जो अनदेखी कर रहे हैं उनकी दुकानदारी चलती रहती है।

कोरबा जिले के ग्राम गोढ़ी में संचालित जैन पब्लिक स्कूल की एक छोटी बस में शुक्रवार को कटघोरा-छुरी मुख्य मार्ग में आग लगने की घटना हुई। सौभाग्यवश इस घटना में कोई भी बच्चा अथवा चालक-परिचालक हताहत नहीं हुए लेकिन घटना छोटी नहीं थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग और उसके उड़नदस्ता की टीम को जैन पब्लिक स्कूल के वाहनों की जांच का ख्याल आया उड़नदस्ता की टीम ने शनिवार को ग्राम गोढ़ी पहुंचकर जैन पब्लिक स्कूलों के बसों की पड़ताल की। बसें बिना परमिट के चलना पाया गया। फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं मिला। स्कूल बस के रूप में संचालित होने के लिए बसों में जरूरी सुरक्षा संसाधन और सामग्रियों की कमी पाई गई। उड़नदस्ता की टीम ने विभिन्न खामियों पर कार्यवाही करते हुए 66 हजार रुपए समझौता शुल्क वसूल किया है।

गौरतलब है कि स्कूली बच्चों के परिवहन में बसों के अलावा टाटा मैजिक, मिनी बस और ऑटो भी लगे हुए हैं। इन वाहनों में भी सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी हो रही है। जिला मुख्यालय में ये हाल है तो आउटर और उपनगर में देखने की तो इन्हें और भी फुर्सत नहीं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रहे भोजराम पटेल फिर संतोष कुमार सिंह के द्वारा ऑटो चालकों को हिदायतें दी गई कि वे स्कूली बच्चों के परिवहन में लापरवाही ना बरतें।

सभी ऐसे ऑटो और वाहनों में जाली नियमित रूप से लगाने निर्देशित किया गया है। इसके अलावा सामने की सीट पर बच्चों को बिठाकर परिवहन नहीं करने की भी हिदायत दी गई है लेकिन इसका कहीं भी कोई भी असर पूर्ण रूप से देखने को नहीं मिल रहा है, क्योंकि ऐसे लापरवाह वाहनों पर कार्रवाई करने में परिवहन विभाग हो या उसका उड़नदस्ता दल हो या फिर पुलिस की टीम हो, कोई कार्रवाई करते नजर नहीं आते। थाना-चौकियों के सामने से सवारी ऑटो हो या स्कूली बच्चों के परिवहन में लगी आटो, सामने भर-भर कर परिवहन हो रहा है। सामने की सीट पर चालक सहित कभी तीन तो कभी 5-5 सवारियां बैठी नजर आती हैं। आंखों से देखकर की जाने वाली अनदेखी लोग समझ नहीं पा रहे हैं और दूसरी और अमला जागरूकता का ढिंढोरा पीटने से बाज नहीं आ रहा।