कोरबा – गेवरा क्षेत्र एसईसीएल में बिलो रेट में जाकर ठेका लेने का रिवाज सा चल पड़ा है। ताजा मामला टैंकरों से गेवरा क्षेत्र के प्रभावित गांवों में पीने के पानी पहुंचाने का है, इस कार्य हेतु एसईसीएल गेवरा द्वारा निविदा जारी किया गया था जिसकी अनुमानित लागत लगभग इकतालीस लाख रुपए लगाई गई थी । परंतु मेसर्स अशोक कुमार पटेल द्वारा उक्त निविदा को लगभग 42% बिलो में डालते हुए सत्ताइस लाख रुपए में वह कार्य लिया गया है, ऐसा एसईसीएल की निविदाओं में सामन्यतः होता रहा है ।
जाहिर सी बात है की अनुमानित लागत से इतने कम रेट में काम लेकर काम पूरा करना तो संभव था नही, हुआ भी वही । अब ठेकेदार द्वारा संबंधित गांवों में पेयजल पहुंचाने में लापरवाही की जा रही है। जिससे सबंधित गांव आमगांव में आज महिलाओं ने पेयजल की समस्या को लेकर मोहल्ले में बाल्टी हांडी और तसला लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है की आमगांव का अधिग्रहण गेवरा प्रबंधन द्वारा किया गया है परंतु कोयला खनन का कार्य दीपका प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है, ऐसे में पेयजल एवं अन्य समस्याओं को संज्ञान में लाने पर दीपका एवम गेवरा एक दूसरे की जिम्मेदारी बताते हुए पल्ला झाड़ने लगते हैं, ऐसे में ठेकेदार द्वारा पानी समय पर न पहुंचाने से गर्मी के इस मौसम बेहद गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
मामले में ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति की अमगांव संयोजक अमृता यादव ने कहा की पेयजल की समस्या को लेकर गेवरा प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी जिसमे प्रबंधन ने पानी की उत्तम व्यवस्था करने की बात कही थी, लेकिन वे अब अपनी बात से मुकर रहे।
मामले में ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति की अमगांव संयोजक अमृता यादव ने कहा की पेयजल की समस्या को लेकर गेवरा प्रबंधन के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी जिसमे प्रबंधन ने पानी की उत्तम व्यवस्था करने की बात कही थी, लेकिन वे अब अपनी बात से मुकर रहे हैं, ऐसे में अगर जल्द से जल्द समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो आने वाले दिनों में गेवरा जी एम कार्यालय में हांडी बर्तन लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।
मामले में ठेकेदार अशोक कुमार पटेल ने फोन पर जानकारी दी की निविदा कार्य को इंजीनियर के निर्देशानुसार किया जा रहा है।
अब देखना ये होगा की दस टैंकरों से गांवों में प्रतिदिन पीने का पानी पहुंचाने का ठेका ४२ प्रतिशत कम दाम में लेने के बावजूद भी जीपीएस सिस्टम में रिकॉर्ड मेंटेन करते हुए काम कैसे पूरा कर पाते हैं और संबंधित विभाग के अधिकारी उनका बिल किस हिसाब से भुगतान करते हैं।










