अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड के सांसद राहुल गांधी अपने छतीसगढ़ दौरे के बाद मुख्यमंत्री पद के विभाजित ढाई साल के कार्यकाल की चर्चा में विराम लगा देगें ऐसी संभावना हैं.ऊंट किस करवट बैठेगा इस संबंध में दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता.मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन में करीब 50 – 55 विधायक आज भी उनके साथ खड़े हैं. जो दिल्ली दरबार की चौखट तक जा पहुंचे थे. कोई भी बहाना बनाकर नेताओं और विधायकों का दिल्ली दौरे का सिलसिला चल ही रहा हैं.संभावित मुख्यमंत्री टी एस सिहदेव को कांग्रेस हाईकमान के फैसले का इंतजार हैं. उनके समर्थकों को तो दृणविश्वास हैं कि फैसला सिहदेव के पक्ष में ही ..

आएगा.राजनीति के जानकार की माने तो कांग्रेस हाईकमान पंजाब कांग्रेस में लगातार जारी सियासी उठापटक के चलते छतीसगढ़ के मामले में कोई निर्णय जल्दबाजी नहीं करेगा. जितना विलम्ब होगा बघेल की स्थिति मजबूत होती जाएगी.जानकारों की माने तो हाईकमान का फैसला अचानक आयेगा वह सबको स्तब्ध करने वाला भी हो सकता हैं.वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम के हालिया बयान से यह बात तो स्पष्ट हो गई हैं छतीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी जमकर हैं. बघेल व सिहदेव समर्थक एक दुसरे को घेरने में जुटे हुए हैं.मरकाम ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ” मैं न भूपेश बघेल के खेमे में हूं और न टी एस सिंहदेव के खेमे में. मैं संगठन का सदस्य हूं और प्रमुख होने के नाते संगठन में अभिभावक की भूमिका निभाना मेरा कर्तब्य हैं.” खेमेबाजी के खेल में विभक्त विधायको की धड़कनें भी तेज हो गई हैं,

सिहदेव समर्थक बिलासपुर विधायक शैलेष पांडे ने तो मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से यह कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस की जबरिया कार्यवाही ऊपर वाले के इसारे से की जा रही हैं. संभवतः पांडे का इशारा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तरफ था. उनके इस बयान के बाद बिलासपुर की राजनीति में गरमाहट आ गई खास करके विरोधी कांग्रेसियों में बौखलाहट देखी गई.आनन फानन में बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने एक बैठक आहूत कर विधायक पांडे के बयान को अनुशासन हीनता की श्रेणी का बताते हुए कांग्रेस से छः वर्ष के लिए निष्कासित करने का प्रस्ताव पारित कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेज दिया हैं.

दूसरी तरफ जब से ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री का कथित मुद्दा कांग्रेस में उछला तो भाजपा नेता भी आग में घी डालने का अवसर नहीं छोड़ रहे हैं.अभी हाल ही में आबकारी मंत्री कवासी लखमा के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी नेताओं से मुलाकात की थी.इसे लेकर भाजपा ने कहा था कि आदिवासी इलाके में शायद कुछ ठीक नहीं चल रहा हैं.इसी बात का जवाब देने लखमा को सामने आना पड़ा.उन्होंने एक बयान में कहा कि भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के ऐसे मुख्यमंत्री है, जो आदिवासी, किसान, मजदूर और पिछड़े वर्ग के लिए काम करने वाले हैं। पन्द्रह साल रमन सरकार ने आदिवासियों की पूछ परख नहीं की.अब कोई मुख्यमंत्री आदिवासियों के लिये काम कर रहा हैं तो इनके पेट मे दर्द क्यो हो रहा हैं.बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं है। भाजपा केवल भड़काने और बरगलाने का काम करती है। भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आज बस्तर में शांति है। उन्होंने कहा, भूपेश बघेल प्रदेश और यहां की जनता के लिए अच्छा काम कर रहे हैं.

इस बीच दिल्ली का अंतिम दौरा कर रायपुर लौटे टी एस सिहदेव ने मीडिया के प्रश्नों का जिस अंदाज से जवाब दिया उससे तो यही लगता हैं कि सिहदेव पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि परिवर्तन होकर ही रहेगा. पंजाब की तर्ज पर अचानक मुख्यमंत्री बदले जाने के सवाल पर सिंहदेव ने कहा कि अचानक नहीं एक प्रक्रिया है, जो चल रही है. लोग ढाई-ढाई साल की बात कर रहे हैं, ढाई साल भी बीत गया. कहीं न कहीं चर्चा चलती रहती है. चर्चा को अंजाम तक ले जाने की जो बात है, वो निर्णय के रूप में आ जाता है. जब मीडिया ने सवाल पूछा आपने कहा था फैसला हाईकमान के पास सुरक्षित है तो फिर इतनी देरी क्यो हो रही है. इसपर टीएस ने कहा कि ये हाईकमान का विशेषाधिकार है कि जब मामला उनके पास है तो फैसला भी उन्ही की तरफ से आएगा कोई समय सीमा नहीं रहती. व्यवहारिकता की बात होती है.पंजाब में किसी ने नही सोचा था कि ऐसी स्थिति आएगी,स्तिथि आ गई. कई कारण होते है उसे देखकर हाइकमान निर्णय लेते है.