Friday, June 12, 2026

चॉकलेट देकर 7 साल की 2 बच्चियों से रेप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना इलाके में 17 साल के नाबालिग ने 7 वर्षीय दो बच्चियों के साथ चॉकलेट देने के बहाने रेप किया है। पकड़े उतारकर उनके साथ गंदी हरकतें की। उनके साथ मारपीट भी की। जब परिजनों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा, तो लड़का भाग गया।

इसकी शिकायत के बाद लड़के को पकड़ने की बजाय पुलिस वाले उसकी मां से बातचीत करने में लगे थे। लड़के की मां ने पुलिस को 10-20 हजार रुपए देने की पेशकश की थी। जब गिरफ्तारी में देरी पर आपत्ति जताई गई, तब पुलिस लड़के को लेकर गई। यह कहना है पीड़िताओं की मां का।

उन्होंने पुलिस पर गंभीर लापरवाही, सबूत नहीं जुटाने, एफआईआर में देरी, लड़के को वीआईपी सुविधा देने और पीड़ित पक्ष पर समझौते के लिए मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इसे लेकर एसएसपी रजनीश सिंह से मिलकर शिकायत की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय गृहमंत्री को भी पत्र लिखा गया है।

पीड़ित परिवार ने एसएसपी रजनीश सिंह से मिलकर शिकायत की है।
पीड़ित परिवार ने एसएसपी रजनीश सिंह से मिलकर शिकायत की है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

पीड़िता बच्चियों के परिजनों के मुताबिक, नाबालिग लड़का चॉकलेट खिलाने के नाम पिछले कई दिनों से बच्चियों के साथ गलत हरकत कर रहा था। लेकिन 27 मई को परिजनों ने उसे देख लिया। उसने गलत काम करते समय बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखा था। 29 मई को आरोपी की गिरफ्तारी हुई, लेकिन पुलिस ने सबूत जब्त नहीं किया।

वारदात से जुड़े सामान (रस्सी सहित अन्य वस्तुएं) और संभावित सबूतों की जानकारी पुलिस को तत्काल दी गई थी। उन्हें तुरंत जब्त करने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद सिरगिट्टी पुलिस ने इन महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। जिससे सबूतों के नष्ट होने की पूरी आशंका है।

वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई FIR

घटना की जानकारी देने के बाद भी सिरगिट्टी पुलिस ने तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई।

बच्चियों को पूछताछ से मानसिक प्रताड़ना

आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद बच्चियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनके निजी अंगों में दर्द होने की पुष्टि हुई और संकेत मिले। इसके बावजूद पुलिस मामले को शुरू से ही कमजोर करने की कोशिश कर रही है। मासूम बच्चियों से बार-बार पूछताछ कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल ‘नील’ कर दिया है।

‘आरोपी पड़ोसी और परिचित है, मामला समाप्त कर लो’- पुलिस बना रही दबाव

पीड़ित मां का कहना है कि, थाना प्रभारी और जांच अधिकारी केस की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को ‘दिशा बदलने’ और ‘समझौता’ करने का दबाव बना रहे हैं। पुलिस पीड़ित पक्ष से कह रही है कि, आरोपी पड़ोसी और परिचित है, इसलिए मामले को यहीं समाप्त कर लेना चाहिए। जिससे पीड़ित परिवार का मनोबल टूट रहा है।