माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, परीक्षा खत्म होने से पहले प्रश्नपत्र या हल कॉपी को किसी माध्यम से प्रसारित करना उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-1998 की धारा-4/10 के तहत दंडनीय अपराध है। लेकिन, ऐसे कृत्य की सूचना जनहित में अपर मुख्य सचिव, डीएम-एसपी, जिला विद्यालय निरीक्षक समेत अन्य अफसरों को देने पर यह धारा लागू नहीं होगी।
पत्रकार अजीत ओझा ने जनहित में ही जिला विद्यालय निरीक्षक व डीएम को वायरल पेपर भेजे थे। पत्रकार का मकसद छात्रहित में नकल व नकल माफिया पर अंकुश लगवाना ही था। फिर भी, सरकारी आदेश को दरकिनार करते हुए पत्रकार अजीत ओझा समेत दो अन्य पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया।
डीएम इंद्रविक्रम सिंह और तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक बृजेश मिश्र को कार्रवाई के लिए भेजे व्हाट्सएप संदेश। सिंह ने तो खुद फोन कर मांगे थे वायरल पर्चे। फिर भी संस्कृत का प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना सरकार को नहीं दी। जाहिर है, नकल माफिया को मिला इसका लाभ।









