कोरबा: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है. जिसमें सामूहिक आयोजन सहित नगाड़ा बजाने पर प्रतिबंध लगाए गया है. इस आदेश से ग्रामीण क्षेत्रों में मायूसी छाई हुई है. क्योंकि इन इलाकों में बिना नगाड़े के ना तो होलिका दहन होता है ना होली मनाई जाती है. गांव में यह परंपरा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. जिसके चलते उक्त नियम और आदेश में संशोधन की मांग भी उठ रही है.
जिला प्रशासन के आदेश से ग्रामीण क्षेत्रों में मायूसी छाई हुई है. कुछ गांव ऐसे हैं जो नगाड़े को काफी महत्व देते हैं. होली के 1 हफ्ते पहले से टोली नगाड़ा बजाने में मस्त हो जाती है. लेकिन पहली बार नगाड़े पर प्रतिबंध के आदेश जारी होने से उन गांव में मायूसी छा गई है. खासकर वनांचल के गांव में नगाड़ा बजाने की परंपरा पखवाड़े भर पहले से शुरू हो जाती है. रोज रात को मंडली नगाड़ा लेकर किसी चौक-चौराहे पर बैठती है और फिर फाग गीत गाकर वे फागुन का स्वागत करते है.
नगाड़ा बेचने वालों को भारी घाटा
प्रशासन के आदेश के बाद से होली से संबंधित बाजार पर भी बुरा असर पड़ रहा है. जिसको देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भी मांग उठ रही है कि आदेश में संशोधन किया जाए. कटघोरा मुख्य चौक पर प्रतिवर्ष आसपास के ग्रामीण नगाड़ा व्यवसायी नगाड़ा बेचने आते हैं. इस आदेश से नगाड़े के कारोबार पर असर साफ दिखाई पड़ रहा है. नगाड़ा बेचने वालों का कहना है कि हम पहले से ही नगाड़ा तैयार कर लिए हैं. बिक्री के लिए बाजार में भी आ चुके हैं. अब जिला प्रशासन ने आदेश दिया है नगाड़ा नहीं बजाना है. ऐसे में खरीदार भी नहीं आ रहे हैं. इससे नगाड़ा व्यवसायियों को लाखों का नुकसान हो रहा है. साल भर में यह उनके कारोबार का इकलौता सीजन होता हैजिला प्रशासन की ओर से होलिका दहन करने से लेकर रंग खेलने तक के लिए नियम निर्धारित कर दिए गए हैं. गाइडलाइन का पालन नहीं किए जाने पर होलिका दहन समिति प्रबंधक और संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गाइडलाइन का पालन करना होगा. इसके साथ ही भारत सरकार और राज्य की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का भी पालन करना होगा.












