Thursday, May 21, 2026

बारिश सिर पर, नाला फाइलों में…! कोरबा नगर निगम में टेंडर का खेल या “जीरो टॉलरेंस” की खुली पोल?

कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार जहां पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात कर रही है, वहीं कोरबा नगर पालिका निगम में नियम-कानून को ताक में रखकर अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के आरोपों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला बालको क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 39 में कूलिंग टावर से डेंगू नाला तक बनने वाले करोड़ों रुपए के आरसीसी नाला निर्माण कार्य से जुड़ा है।

करीब 5 करोड़ 51 लाख रुपए की लागत वाले इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के लिए नगर निगम द्वारा टेंडर जारी किया गया था। लेकिन अब यह पूरा मामला विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल पांच ठेकेदारों में से दो को नियमों की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से डिसक्वालिफाई कर दिया गया, जबकि 16 प्रतिशत कम दर वाले ठेकेदार को आनन-फानन में कार्य आवंटित कर दिया गया।

सवालों के घेरे में टेंडर प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार जिन ठेकेदारों को बाहर किया गया, उन्हें विभाग की ओर से कोई लिखित सूचना तक नहीं दी गई। सामान्य प्रक्रिया के तहत यदि किसी ठेकेदार के दस्तावेज या तकनीकी बिंदुओं में त्रुटि हो तो उसे अपना पक्ष रखने और सुधार का अवसर दिया जाता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय पटकथा के तहत चलाई गई।

इतना ही नहीं, जिस ठेकेदार को काम दिया गया है, उसके दस्तावेजों और मापदंडों में भी कई त्रुटियां होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद उसे काम सौंप देना नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

“अफसर-ठेकेदार पार्टनरशिप” की चर्चा गर्म

नगर निगम के गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि संबंधित ठेकेदार की साझेदारी निगम के एक बड़े अधिकारी से बताई जा रही है। यही वजह है कि नियमों को दरकिनार कर फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाया गया। हालांकि इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से कार्रवाई हुई है उसने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।

बरसात सिर पर, नाला निर्माण अब तक शुरू नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान वार्ड की निचली बस्तियों और सड़कों में जलभराव से जनता बेहाल हो गई थी। उस समय नगर निगम ने दावा किया था कि अगली बारिश से पहले नाला निर्माण पूरा करा लिया जाएगा ताकि पानी आसानी से डेंगू नाला पुल तक बह सके।

लेकिन गर्मी बीत गई, बारिश आने वाली है और अभी तक निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हो पाया। पूरा मामला अब भी टेंडर प्रक्रिया में उलझा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अधिकारियों की घोर लापरवाही है, जिसका खामियाजा फिर जनता को भुगतना पड़ेगा।

सीएसईबी चौक का काम भी बंद, आखिर क्यों?

इसी बीच सीएसईबी चौक में चल रहे “सेट निर्माण कार्य” को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार वहां खुदाई तक हो चुकी थी। मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद मंत्री लखन लाल देवांगन से जल्दबाजी में भूमि पूजन कराया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही काम बंद हो गया।

अब जनता पूछ रही है कि आखिर निर्माण कार्य क्यों रोक दिया गया? क्या तकनीकी दिक्कत है, फंड की समस्या है या फिर अंदरखाने कोई और खेल चल रहा है? नगर निगम अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए है।

जनता पूछ रही — क्या कोरबा में “विशेष छूट” है?

पूरा मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या कोरबा नगर निगम को भ्रष्टाचार और मनमानी के लिए विशेष छूट मिली हुई है? यदि सरकार वास्तव में “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है तो इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होना जरूरी है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया की जांच कर पूरी पारदर्शिता के साथ योग्य ठेकेदार को काम दिया जाए ताकि समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पूरा हो सके और बरसात में जनता को राहत मिल सके।